हाईकोर्ट ने किया अवैध खनन की जांच के लिए कोर्ट कमिश्नर नियुक्त

News Desk
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उत्तराखण्ड हाई कोर्ट ने पिथौरागढ़ के कानड़ी गाँव मे खनन सामग्री को लाने व ले जाने के लिए पट्टाधारक द्वारा अवैध रूप से सड़क निर्माण करने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट की खण्डपीठ ने मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर मय फोटोग्राफ सहित रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने 27 सितंबर की तिथि नियत की है। पूर्व के आदेश पर आज सैकेट्री खनन डॉक्टर पंकज पांडे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। उनकी तरफ से पूर्व के आदेश का अनुपालन रिपोर्ट कोर्ट में पेश की। जिसमें कहा गया कि मामले की जांच हेतु जिलाधिकारी को आदेश दे दिए और सम्बंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस दे दिए हैं। पट्टधारक का लाइसेंस निरस्त कर दिया है। जबकि पट्टधारक का कहना है कि उन्होंने कोई रोड का निर्माण नही किया बल्कि पहले से रोड बनी हुई थी। जिसपर कोर्ट ने मामले की वास्तविक स्थिति से अवगत होने के लिए कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर फोटोग्राफ सहित रिपोर्ट पेश करने को कहा है।  

                                  
   आपकों बता दे कि पिथौरागढ़ के कानड़ी गाँव निवासी नीमा वल्दिया ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि उनके गांव में नदी के किनारे सरकार ने खनन हेतु 2022 में पट्टा लीज पर दिया था। सुरु में पट्टाधारक ने मजदूर लगाकर खनन कार्य किया। बाद में खनन समाग्री को लाने व ले जाने के लिए उसने बिना अनुमति के वहाँ सड़क निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया ।

सड़क निर्माण के दौरान उसके द्वारा 100 से अधिक खैर व साल के पेड़ काट दिए। जब  ग्राम वासियों ने इसका विरोध किया तो कुछ समय के लिए उसने सड़क निर्माण का कार्य बंद कर दिया । विरोध के सांत होने के बाद उसने फिर से सड़क निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया। जिला प्रसाशन ने भी उनकी  शिकायत पर कोई निर्णय नही लिया। जनहित याचिका में कोर्ट से प्राथर्ना की गई है कि अवैध रूप से बन रही सड़क निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाय।

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